लखनऊ: विधान परिषद की लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन सीट पर भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई। मतगणना के दूसरे और अंतिम चक्र के बाद उन्हें कुल 12,508 मत मिले। उन्होंने सपा प्रत्याशी सुशील कुमार को छह हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया। जीत की घोषणा के बाद भाजपा समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, सपा प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते परिणाम घोषित होने में करीब दो घंटे की देरी हुई। विरोध शांत होने के बाद रात करीब सवा दो बजे नतीजे घोषित किए गए।
पहले चक्र से ही उमेश द्विवेदी ने बनाई बढ़त
मतगणना के पहले चक्र से ही उमेश द्विवेदी अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहे। इस चक्र में उन्हें 7,189 वोट मिले, जबकि सपा के सुशील कुमार को 3,537 मत प्राप्त हुए। इस तरह उमेश द्विवेदी ने शुरुआती दौर में ही 3,652 मतों की बढ़त बना ली थी।
पहले चक्र की गिनती में उमेश द्विवेदी सभी 14 टेबलों पर आगे रहे। टेबल नंबर पांच पर उन्हें सबसे ज्यादा 617 मत मिले, जबकि इसी टेबल पर सुशील कुमार को 213 वोट प्राप्त हुए। यहां भाजपा प्रत्याशी की बढ़त 404 मतों की रही। टेबल नंबर तीन पर उमेश को 606 और टेबल नंबर 11 पर 574 मत मिले। वहीं, टेबल नंबर 13 पर दोनों प्रत्याशियों के बीच सबसे कम अंतर रहा। यहां उमेश द्विवेदी को 405 और सुशील कुमार को 335 वोट मिले। निर्दलीय प्रत्याशी जगजीवन प्रसाद शुक्ल 760 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
मतगणना में गड़बड़ी के आरोप, आंकड़ों पर उठाए सवाल
लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन की मतगणना के दौरान मंगलवार को कई प्रत्याशियों ने कथित अनियमितताओं को लेकर आपत्ति जताई। सपा की स्नातक प्रत्याशी कांति सिंह ने फॉर्म-16 में दर्ज मतों की संख्या और मतपेटियों से निकले मतपत्रों की संख्या में अंतर होने का आरोप लगाया।
कांति सिंह ने दावा किया कि मतों का सही मिलान नहीं हो रहा है और प्रत्याशियों को फॉर्म-16 भी उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए अधिकारियों से शिकायत की। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निर्दलीय प्रत्याशी विजय कुमार बंधु और स्मिता मिश्रा ने भी मतपत्र खुले मिलने तथा मतपेटियों पर दर्ज नंबरों में अंतर होने पर सवाल उठाए। विजय कुमार बंधु का कहना था कि मतदाता मतपत्र को मोड़कर मतपेटी में डालते हैं, ताकि मतदान की गोपनीयता बनी रहे। ऐसे में खुले मतपत्र मिलने पर उन्होंने आपत्ति जताई।
स्मिता मिश्रा ने भी मतपेटियों से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, कुछ मतपेटियों से निर्धारित संख्या से अधिक मतपत्र मिले। राजकीय शिक्षक संघ की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष छाया शुक्ला ने भी मतगणना में अनियमितताओं की आशंका जताई।
वैध और अवैध मतों को लेकर हुआ हंगामा
शिक्षक निर्वाचन की मतगणना के दौरान शाम करीब 4:30 बजे वैध और अवैध मतों को लेकर विवाद शुरू हो गया। कुछ मतपत्रों पर लिखे नंबरों में गड़बड़ी का हवाला देते हुए प्रत्याशियों के एजेंटों ने उन्हें अवैध घोषित करने की मांग की, जबकि प्रशासनिक अधिकारी उन्हें वैध मान रहे थे। इसी मुद्दे पर मतगणना कर्मियों और प्रत्याशियों के एजेंटों के बीच नोकझोंक होने लगी।
स्थिति बिगड़ने पर एडीएम प्रशासन प्रदीप वर्मा और तहसीलदार सदर अविनाश पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। विवादित मतपत्र को रिटर्निंग ऑफिसर की टेबल पर ले जाकर नियमानुसार निर्णय करने की बात कही गई।
विवादित मतपत्र अलग रखकर आगे बढ़ाई गई मतगणना
वैध और अवैध मतों को लेकर प्रत्याशी तथा उनके एजेंट अपनी मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच बहस होती रही। स्थिति को देखते हुए विवादित मतपत्र को अलग रख दिया गया और इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
विरोध और हंगामे के कारण परिणाम घोषित करने में देरी हुई। आखिरकार स्थिति शांत होने के बाद रात करीब सवा दो बजे लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन सीट का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी विजयी रहे।
